बुधवार, 22 सितंबर 2010

प्यार ढूंढते ही रहे, जीवन भर हम मगर,

प्यार ढूंढते ही रहे,
जीवन भर हम मगर,
हमारी बद नसीबी देखिये,
हमे प्यार ही ना मिल सका,...........

दोस्त निकले बेवफा,
एतवार तोडा यार ने,
जिस पर हम एतवार करते,
ऐसा यार ही ना मिल सका,............

जिसने जब तक चाहा, हमसे खेला,
जब दिल चाहा, छोड़ दिया,
जब भी अपना मतलब पूरा हो गया,
सीसे सा दिल तोड़ दिया,............

बेवफाओं की दुनिया मैं,
वफा तलासते रातों दिन,
जीकर भी क्या करेंगे,
सूना जग ये तेरे बिन,............

1 टिप्पणी:

  1. प्यार न मिलना कमी नही, कभी मजबूती देती है,
    फर्क नज़रिये का है बेवफा भी किसी को वफा देती है,

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